CISF यूनिट में भ्रष्टाचार का आरोप, धनबाद के 2 अधिकारियों पर CBI केस

Dhanbad CISF CBI FIR__

पेन ड्राइव में मिले 3 ऑडियो क्लिप और विभागीय जांच के आधार पर कार्रवाई

तत्कालीन डिप्टी कमांडेंट और महिला इंस्पेक्टर जांच के घेरे में

धनबाद: कोयला नगरी धनबाद में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के दो तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप में CBI ने प्राथमिकी दर्ज की है। मामला BCCL के कोयला नगर स्थित CISF यूनिट से जुड़ा है। CBI की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB), धनबाद ने शिकायत, विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है। FIR में तत्कालीन डिप्टी कमांडेंट ओम कुमार तंवर और तत्कालीन महिला इंस्पेक्टर राजलक्ष्मी वर्मा के नाम शामिल हैं।

पेन ड्राइव में तीन ऑडियो क्लिप का दावा
इस पूरे मामले में एक पेन ड्राइव को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से दी गई पेन ड्राइव में तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग होने की बात FIR में दर्ज है। शिकायत के बाद CISF स्तर पर विभागीय जांच कराई गई। जांच के दौरान अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने की जानकारी दी गई। CBI की प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि पेन ड्राइव में मौजूद ऑडियो क्लिप में सुनाई देने वाली आवाजें तत्कालीन डिप्टी कमांडेंट ओम कुमार तंवर और इंस्पेक्टर राजलक्ष्मी वर्मा की आवाज से मिलती-जुलती होने की बात जांच में सामने आई। हालांकि, किसी ऑडियो में मौजूद आवाज की पहचान और उसकी प्रमाणिकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष CBI की जांच के बाद ही सामने आएगा।

यूनियन की शिकायत से शुरू हुआ मामला
FIR के मुताबिक मामले की शुरुआत ऑल इंडिया कोल माइंस यूनियन, झारखंड के मदन सिंह की शिकायत से हुई। उन्होंने BCCL धनबाद की CISF यूनिट में तैनात कुछ अधिकारियों और जवानों पर भ्रष्टाचार तथा कथित अनुचित गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए थे। शिकायत के साथ पेन ड्राइव भी उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें तीन ऑडियो क्लिप होने की बात कही गई। यह शिकायत CISF के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, जिसके बाद मामले की विभागीय जांच कराई गई।

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विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख
CBI की FIR में विभागीय जांच के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें संबंधित अधिकारियों की ओर से गंभीर वित्तीय अनियमितताएं किए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसी के साथ शिकायत के साथ उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच का हिस्सा बनी। CBI अब विभागीय जांच के दस्तावेजों और ऑडियो रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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CISF मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने दर्ज कराई शिकायत
मामले में CISF मुख्यालय, नई दिल्ली के CVO/IG (Personnel) जोस मोहन, IPS की शिकायत भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार उन्होंने 25 फरवरी 2026 को पत्र के माध्यम से दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की। उनकी शिकायत के साथ मदन सिंह की मूल शिकायत, पेन ड्राइव और सीडी को भी संबंधित दस्तावेजों के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद मामले को CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, धनबाद तक भेजा गया और CBI ने नियमित प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।

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किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
CBI ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। धारा 7 लोक सेवक से जुड़े रिश्वत/अनुचित लाभ के अपराध से संबंधित है, जबकि BNS की धारा 61(2) आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान है।

DSP विकास कुमार पाठक करेंगे जांच
मामले की जांच की जिम्मेदारी CBI ACB धनबाद के DSP विकास कुमार पाठक को सौंपी गई है। जांच के दौरान CBI कई पहलुओं को खंगालेगी। इनमें शिकायत में लगाए गए आरोप, पेन ड्राइव में मौजूद तीन ऑडियो क्लिप, सीडी, विभागीय जांच की रिपोर्ट और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा CBI यह भी जांच सकती है कि कथित वित्तीय लेनदेन में किन लोगों की भूमिका थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई अन्य दस्तावेजी या डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं।

FIR के बाद अब जांच में सामने आएगी सच्चाई
CISF जैसे केंद्रीय सुरक्षा बल की यूनिट से जुड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में CBI FIR दर्ज होने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आ गया है। हालांकि, FIR में आरोप दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अब CBI की जांच में शिकायत, ऑडियो रिकॉर्डिंग, विभागीय जांच और वित्तीय दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है।

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