पुलिस थानों में CCTV पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव-गृह सचिव और DGP से जवाब तलब

Jharkhand High Court CCTV

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में देरी पर नाराजगी, 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई

रांची: झारखंड के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में हो रही देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को शो कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। तीनों वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा गया है कि अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में कथित देरी को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी।

अदालत ने सरकार की कार्यशैली पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पुलिस थानों में CCTV लगाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से दाखिल रिकॉर्ड और जवाब पर नाराजगी जताई। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत के निर्देशों के अनुपालन में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा गया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है और अधिकारियों को पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

ईचागढ़ हिरासत मामले से शुरू हुई थी निगरानी
यह मामला ईचागढ़ में पुलिस हिरासत के दौरान कथित प्रताड़ना से जुड़े प्रकरण से सामने आया था। हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में लिया और इसके बाद राज्य के पुलिस थानों में CCTV कैमरों की उपलब्धता तथा अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन की निगरानी शुरू की। CCTV को लेकर अदालत का जोर पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं की रिकॉर्डिंग, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने से जुड़ा है।

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2018 के बाद 450 से ज्यादा हिरासत मौतों का जिक्र
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने 2018 के बाद पुलिस या न्यायिक हिरासत में हुई 450 से अधिक मौतों का जिक्र किया और कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था का प्रभावी होना जरूरी है। इससे पहले हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी हिरासत में मौतों की संख्या को लेकर राज्य सरकार से जानकारी मांगी गई थी। फरवरी 2026 के एक आदेश में सरकार की ओर से 2018 से 2025 के बीच पुलिस या न्यायिक हिरासत में करीब 437 मौतों का आंकड़ा प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। मई 2026 के एक अन्य फैसले में हाईकोर्ट ने हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच और रिकॉर्ड की उपलब्धता को लेकर भी कई निर्देश जारी किए थे। इनमें CCTV फुटेज समेत संबंधित रिकॉर्ड को न्यायिक मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख है।

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चार बार टेंडर के बाद भी CCTV लगाने का मामला अटका
अदालत ने कहा कि पुलिस थानों में CCTV लगाने के लिए चार बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया। इस स्थिति को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान विभागीय जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठे। अदालत ने डीजीपी की ओर से मामले की जिम्मेदारी गृह विभाग पर डालने के रुख पर नाराजगी जताई और इसे उचित नहीं माना।

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अब अधिकारियों को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को शो कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अब अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि पूर्व न्यायिक निर्देशों के बावजूद पुलिस थानों में CCTV लगाने की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो सकी और अब तक की वास्तविक प्रगति क्या है। 15 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में अधिकारियों के जवाब और CCTV स्थापना की स्थिति अदालत के सामने रखी जाएगी। इस मामले में अगला महत्वपूर्ण बिंदु यह होगा कि राज्य सरकार थानों में CCTV की वास्तविक स्थिति, अब तक की टेंडर प्रक्रिया और अदालत के निर्देशों के अनुपालन को लेकर क्या जवाब दाखिल करती है।

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