रूसी तेल खरीद पर ट्रंप का सख्त रुख, भारत पर टैरिफ बढ़ाने की दी चेतावनी

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टैरिफ को लेकर ट्रंप का कड़ा संदेश

मुनादी Live डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए भारत को चेतावनी दी है। रूसी तेल की खरीद को लेकर ट्रंप ने कहा है कि यदि व्यापार संतुलन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा। एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि व्यापारिक दबाव अमेरिका की रणनीति का हिस्सा बना रहेगा।

पीएम मोदी की तारीफ के साथ सख्त लहजा
अपने बयान में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की, लेकिन साथ ही कड़ा संदेश देने से भी नहीं चूके। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अच्छे आदमी ही नहीं, बल्कि एक अच्छे इंसान भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना जरूरी था। ट्रंप के इस बयान को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बढ़ते तनाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

“बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं”
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार करता है और अमेरिका बहुत जल्दी भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। उनके इस बयान ने एक बार फिर संकेत दिया है कि अमेरिकी प्रशासन व्यापार घाटे और ऊर्जा आयात को लेकर किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं है।

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नवंबर 2025 में रूसी तेल की हिस्सेदारी 35%
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत ने रूस से करीब 7.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया। यह देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 35.1 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा नवंबर 2024 की तुलना में करीब 7 प्रतिशत अधिक है और मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।

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मूल्य के हिसाब से भी रूस सबसे आगे
मूल्य के लिहाज से भारत ने नवंबर 2025 में रूस से करीब 3.7 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। यह उस महीने के कुल तेल आयात बिल का लगभग 34 प्रतिशत था। इस तरह मात्रा और मूल्य दोनों ही मामलों में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा।

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टैरिफ विवाद पहले भी बढ़ा चुका है तनाव
गौरतलब है कि भारत ने सालाना आधार पर रूस से तेल आयात में कटौती की थी। इसके बावजूद अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूसी तेल आयात के मुद्दे पर भारत पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। इस फैसले से भारत में यह असंतोष बढ़ा कि रूस से तेल आयात घटाने के प्रयासों के बावजूद अमेरिका का दबाव कम नहीं हो रहा है।

अमेरिका से तेल आयात भी बढ़ाया भारत ने
अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत ने संतुलित रणनीति अपनाते हुए अमेरिकी तेल आयात में भी इजाफा किया है। नवंबर 2025 में भारत का अमेरिकी तेल आयात बढ़कर करीब 2.8 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले सात महीनों का उच्चतम स्तर रहा।

अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी 12.6% तक पहुंची
आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में अमेरिका से तेल आयात की कुल कीमत लगभग 1.4 बिलियन डॉलर रही। इसके साथ ही भारत के कुल तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। यह एक महीने पहले 4.2 प्रतिशत और एक साल पहले 5.1 प्रतिशत थी।

भारत की ऊर्जा नीति पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
कुल मिलाकर रूसी तेल को लेकर ट्रंप की चेतावनी ने भारत की ऊर्जा नीति और विदेश व्यापार रणनीति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस दबाव के बीच अपने आर्थिक हितों और कूटनीतिक संतुलन को कैसे साधता है।

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