पलांडू टाटा रोड पर भीषण हादसा, 108 एंबुलेंस सेवा पर उठे सवाल, 4 घंटे बाद पहुंची मदद

Ranchi Road Accident

रांची: राजधानी रांची के पलांडू टाटा रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हादसे में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आरोप है कि सूचना देने के बावजूद 108 एंबुलेंस कई घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची।

नामकुम थाना पुलिस ने संभाला मोर्चा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा काफी भयावह था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पते रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस के नामकुम थाना की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को अपने वाहनों से उठाकर इलाज के लिए ईएसआई हॉस्पिटल नामकुम पहुंचाया।

प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर इलाज के लिए Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) रेफर किया गया।

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108 एंबुलेंस पर लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया गया था, लेकिन कई घंटों तक कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। बताया गया कि रात लगभग 10 बजे, यानी करीब चार घंटे बाद एक एंबुलेंस पहुंची, जिसने मृत महिला के शव को रिम्स पहुंचाया। इस देरी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंचती, तो घायलों को और तेजी से इलाज मिल सकता था।

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आपातकालीन सेवा की व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद एक बार फिर राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि 108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य दुर्घटना या आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना है, लेकिन कई बार कॉल करने के बावजूद समय पर सेवा नहीं मिलती। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गंभीर सड़क हादसे जैसी स्थिति में भी घंटों इंतजार करना पड़ा, जो बेहद चिंताजनक है।

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महिला की मौत से परिजनों में मातम
हादसे में जान गंवाने वाली महिला की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटना के बाद सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी और जाम जैसी स्थिति भी बनी रही।

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से 108 एंबुलेंस सेवा की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क हादसों में शुरुआती “गोल्डन ऑवर” सबसे महत्वपूर्ण होता है और इसी दौरान इलाज मिलने पर कई जानें बचाई जा सकती हैं।
ऐसे में आपातकालीन सेवाओं में देरी सीधे लोगों की जिंदगी पर असर डालती है।

पलांडू टाटा रोड पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है तथा 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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