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हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला: हर जिले में बनेगी मॉडल कृषक पाठशाला, मिलेट और दलहन खेती को मिलेगा बढ़ावा

Hemant Soren Agriculture Review Meeting

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार की सभी किसान हितैषी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए आधुनिक तकनीक आधारित खेती, पशुपालन तथा सहकारिता को मजबूत बनाया जाएगा। बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हर जिले में बनेगी मॉडल कृषक पाठशाला
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के हर जिले में कम से कम एक मॉडल कृषक पाठशाला विकसित की जाए। इसके लिए किसी एक गांव या पंचायत का चयन कर वहां आधुनिक खेती, मिट्टी जांच, सिंचाई, प्रशिक्षण और नई कृषि तकनीकों पर आधारित मॉडल तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संचालित 57 किसान पाठशालाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा कृषि विश्वविद्यालयों एवं अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाए।

दलहन और मिलेट खेती पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य में दलहन एवं मिलेट (श्री अन्न) की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम वर्षा वाले जिलों, विशेषकर पलामू प्रमंडल में किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने जैविक खेती, व्यावसायिक खेती और जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।

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किसान समृद्धि योजना को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को सौर ऊर्जा संचालित पंपसेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाए ताकि सिंचाई की लागत कम हो और किसानों की आय बढ़ सके। उन्होंने अधिकारियों को PM-कुसुम योजना और JREDA के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया।

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हर प्रमंडल में लगेगा कृषि व्यापार मेला
मुख्यमंत्री ने कहा कि रांची में आयोजित राज्यस्तरीय कृषि व्यापार मेला की तर्ज पर अब अलग-अलग वर्षों में सभी प्रमंडलों में कृषि व्यापार मेले आयोजित किए जाएं। इससे किसानों को नई तकनीक, आधुनिक उपकरण और बाजार की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

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पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर रहेगा फोकस
बैठक में मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, सूकर पालन, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माइनिंग क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए पशुपालन आधारित बिजनेस मॉडल विकसित किया जाए ताकि उनकी आय बढ़ सके। साथ ही पशुओं के नियमित टीकाकरण, आधुनिक पशु चिकित्सालय और बेहतर पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर दिया गया।

मशरूम और मधुमक्खी पालन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने तथा महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला किसान उत्पादक समूहों को मशरूम उत्पादन से जोड़ने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को सुरक्षा किट (PPE) उपलब्ध कराने की भी बात कही, ताकि वे सुरक्षित तरीके से कार्य कर सकें।

लैम्प्स और पैक्स को करेंगे मजबूत
मुख्यमंत्री ने राज्य की लैम्प्स (LAMPS) और पैक्स (PACS) समितियों को अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों से कृषि उत्पाद की खरीद, भुगतान और बीज वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही शीर्ष सहकारी समितियों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने और कंप्यूटरीकरण तथा बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने पर भी बल दिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किसानों से की बात
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गढ़वा की किसान पाठशाला, दुमका के किसान सुरेश मरांडी और जामताड़ा के कृषि अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत कर जमीनी स्तर पर योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचे और किसी एक लाभार्थी को बार-बार लाभ देने के बजाय नए किसानों को भी योजनाओं से जोड़ा जाए।

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