राजमाता अहिल्याबाई सनातन संस्कृति की ध्वजवाहक : राकेश पाल

Ahilyabai Holkar

गढ़वा: गढ़वा जिला मुख्यालय में गुरुवार को गढ़वा जिला पाल महासंघ के तत्वावधान में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नीलांबर-पीतांबर बहुउद्देशीय नगर भवन के समीप स्थित राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर पाल समाज के लोगों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम को लेकर प्रतिमा स्थल और आसपास के परिसर की विशेष साफ-सफाई की गई थी। इसके बाद परिसर को फूलों से सजाया गया। गढ़वा जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे पाल समाज के लोगों ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी योगदान को याद किया। इस दौरान “अहिल्याबाई होल्कर अमर रहें” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

सनातन संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान : राकेश पाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख समाजसेवी राकेश पाल ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय सनातन संस्कृति की ध्वजवाहक थीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अहिल्याबाई होल्कर ने समाज सेवा, धर्म और जनकल्याण को अपने शासन का महत्वपूर्ण आधार बनाया। राकेश पाल ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर और गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर सहित अनेक धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने धर्मशालाओं, जलस्रोतों और जनसुविधाओं के निर्माण को भी बढ़ावा दिया।

उन्होंने कहा कि उस दौर में एक महिला शासक द्वारा समाज और धर्म के प्रति जिस प्रकार का समर्पण दिखाया गया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। अहिल्याबाई होल्कर का जीवन यह संदेश देता है कि नेतृत्व का वास्तविक उद्देश्य केवल सत्ता संचालन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और सुविधाएं पहुंचाना होना चाहिए।

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अहिल्याबाई होल्कर का जीवन समाज के लिए प्रेरणा : सुधीर पाल
गढ़वा जिला पाल महासंघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार पाल ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर का पूरा जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि गड़रिया पाल वंश में जन्मीं राजमाता अहिल्याबाई होल्कर समाज की गौरवशाली धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि पाल समाज के लोगों को उनके जीवन से संघर्ष, सेवा, नेतृत्व, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा लेनी चाहिए। अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में जनकल्याण को प्राथमिकता देकर एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।

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विभिन्न गांवों से पहुंचे पाल समाज के लोग
पुण्यतिथि कार्यक्रम में गढ़वा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पाल समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। जोबरईया, सहिजना, नवादा, तिलदाग, परिहारा, बरवाही और नगदरवा सहित कई गांवों से पहुंचे लोगों ने राजमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज की एकजुटता, शिक्षा और सामाजिक विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महान विभूतियों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने का उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

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सामाजिक एकता और नई पीढ़ी को प्रेरणा देने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में प्रशासन चलाने के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक संस्थानों के संरक्षण तथा जनकल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। पाल महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नई पीढ़ी को अहिल्याबाई होल्कर के संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जानकारी देना जरूरी है, ताकि युवा अपने इतिहास और समाज की महान विभूतियों से प्रेरणा ले सकें।

आयोजन में महासंघ के पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम को सफल बनाने में पाल महासंघ के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पाल, मीडिया प्रभारी जितेंद्र कुमार पाल, दिलीप पाल, योगेंद्र पाल, सत्येंद्र पाल, उदय पाल और अजय पाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर महासंघ के संरक्षक बुधन पाल, रामदास पाल, विश्वनाथ पाल, नागेंद्र पाल, शिवपूजन पाल, मंजय पाल, मनीष पाल, रामदेव पाल, विजय पाल सहित सुनीता देवी, प्रभा देवी और अनीता देवी समेत बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।

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