चीनी से इथेनॉल बनाने पर रोक, 1 नवंबर से लागू होगा नया नियम; सरकार का बड़ा फैसला
चीनी की उपलब्धता बचाने पर जोर, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा
नई दिल्ली: देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण की कोशिशों के बीच केंद्र सरकार ने इथेनॉल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी तेल कंपनियां चीनी, गन्ने के रस, शुगर सिरप और B-Heavy Molasses से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक लागू रहने वाले आपूर्ति वर्ष के नए खरीद टेंडर पर लागू होगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने और चीनी की मात्रा को सुरक्षित रखना है, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश और आगामी उत्पादन को लेकर बनी चिंताओं के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है।
किन उत्पादों से बने इथेनॉल की खरीद नहीं होगी?
नए खरीद टेंडर में इन स्रोतों से बने इथेनॉल के लिए बोली स्वीकार नहीं की जाएगी:
- चीनी (Sugar)
- गन्ने का रस (Sugarcane Juice)
- शुगर सिरप (Sugar Syrup)
- बी-हैवी शीरा (B-Heavy Molasses)
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि देश में इथेनॉल का उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सी-हैवी शीरा (C-Heavy Molasses) से बने इथेनॉल की खरीद जारी रह सकती है। इसके अलावा मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले अधिशेष चावल और अन्य पात्र स्रोतों से बने इथेनॉल के लिए भी खरीद व्यवस्था रखी गई है।
चीनी की उपलब्धता बचाने पर जोर
इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस, चीनी और शुगर सिरप का इस्तेमाल करने से चीनी बनाने के लिए उपलब्ध कच्चे माल का एक हिस्सा ईंधन उत्पादन की ओर चला जाता है। ऐसे समय में जब घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता हो, तो सरकार के सामने खाद्य जरूरतों और ईंधन नीति के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है। नए फैसले के जरिए सरकार ने आगामी आपूर्ति वर्ष में चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने पर रोक लगाने का कदम उठाया है। इससे चीनी मिलों के लिए गन्ने से चीनी उत्पादन को प्राथमिकता देने की गुंजाइश बढ़ सकती है। हालांकि, बाजार में चीनी की कीमतों पर वास्तविक असर उत्पादन, आयात, मांग और वितरण सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा
सरकार का यह निर्णय पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को समाप्त नहीं करता। तेल कंपनियों ने 2026-27 के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद हेतु टेंडर जारी किया है। इसका उद्देश्य वैकल्पिक स्रोतों से इथेनॉल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। मक्का, टूटे चावल, FCI के अधिशेष चावल और पात्र कृषि-आधारित कच्चे माल से बने इथेनॉल की भूमिका इस व्यवस्था में बढ़ सकती है। इससे इथेनॉल उत्पादकों को अपने कच्चे माल और उत्पादन की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।
चीनी मिलों और इथेनॉल उद्योग पर क्या होगा असर?
इस फैसले का असर चीनी मिलों, डिस्टिलरी और कृषि आधारित इथेनॉल उद्योग पर अलग-अलग पड़ सकता है। चीनी आधारित इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों को वैकल्पिक कच्चे माल या उत्पादन व्यवस्था पर विचार करना होगा। वहीं, अनाज आधारित इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। दूसरी ओर, मक्का और चावल जैसे कच्चे माल की उपलब्धता, खरीद मूल्य और परिवहन लागत भी महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के सामने चुनौती यह रहेगी कि चीनी की घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखते हुए पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे।
आगे क्या?
1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाला नया आपूर्ति वर्ष चीनी और इथेनॉल बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा। इस दौरान घरेलू चीनी उत्पादन, बाजार की कीमतों, वैकल्पिक कच्चे माल की उपलब्धता और इथेनॉल खरीद की प्रगति पर नजर रहेगी।
सरकार ने चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए 2026-27 के इथेनॉल खरीद टेंडर में चीनी आधारित कुछ प्रमुख स्रोतों को बाहर रखा है। लेकिन इथेनॉल उत्पादन और पेट्रोल में मिश्रण का कार्यक्रम जारी रहेगा, जिसमें वैकल्पिक कच्चे माल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
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