OBC आरक्षण की मांग पर 5 जिलों में बंद, गुमला में सड़कें जाम; टावर चौक पर थमे वाहनों के पहिए

OBC Reservation

OBC आरक्षण और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग

Ranchi: OBC आरक्षण और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी समेत विभिन्न मांगों को लेकर केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने मंगलवार को गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रांची और लोहरदगा में बंद और चक्का जाम का आह्वान किया है। बंद का सबसे ज्यादा असर गुमला में देखने को मिल रहा है। सुबह से ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर आए और कई स्थानों पर वाहनों का परिचालन रोक दिया। बंद के कारण ट्रक, बस और छोटी-बड़ी गाड़ियों के पहिए थम गए हैं। शहर से लेकर अलग-अलग प्रखंडों तक सड़क जाम होने से कई जगह वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। इससे आम लोगों के साथ स्कूली बच्चों और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

टावर चौक पर सड़क जाम, स्कूली बच्चे हुए परेशान
गुमला शहर के टावर चौक के पास भी बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर दिया। सड़क पर वाहनों का आवागमन बाधित होने से स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी हुई। कुछ बच्चे डाला लगी गाड़ियों के जरिए स्कूल पहुंचे, जबकि कई लोगों को जाम के कारण अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत हुई। गुमला शहर के अलावा जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी बंद समर्थक सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर टायर जलाकर सड़क जाम किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसके चलते सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं।

आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति की ओर से OBC समाज को आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने की मांग की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों और अन्य क्षेत्रों में ओबीसी समाज को उसकी आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ ओबीसी समुदाय को उसके अधिकारों के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।

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सरकारी नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा
OBC समाज की प्रमुख मांगों में सरकारी नौकरियों में आरक्षण और उचित प्रतिनिधित्व के अलावा राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का मुद्दा भी शामिल है। आंदोलनकारियों की ओर से PESA कानून के तहत अधिकार देने की मांग भी उठाई जा रही है। समिति का तर्क है कि आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी सुनिश्चित होने से पिछड़े वर्गों को विभिन्न क्षेत्रों में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

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जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग
आंदोलन की एक प्रमुख मांग जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम रखने की भी है। समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि OBC आबादी का स्पष्ट आंकड़ा सामने आने से सरकार को सामाजिक कल्याण और विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। आंदोलनकारियों के मुताबिक आबादी से संबंधित सटीक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण, प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं को लेकर नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

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बंद से पहले निकाला गया मशाल जुलूस
बंद के समर्थन में सोमवार को भी कई जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलनकारियों ने मशाल जुलूस निकाला था। इसके बाद मंगलवार को पांच जिलों में बंद और चक्का जाम का आह्वान किया गया। गुमला के अलग-अलग प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन भी किए जाने की जानकारी है। आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से सकारात्मक निर्णय की मांग कर रहे हैं।

‘मांगों पर फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा’
OBC समाज के नेता दिलीप नाथ साहू ने कहा कि समाज अपने अधिकार और आरक्षण की मांग को लेकर एकजुट है। उनके मुताबिक जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समिति ने बंद को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सफल बनाने की अपील की है। वहीं, बंद के कारण सड़क यातायात प्रभावित होने से आम लोगों को हो रही परेशानी भी सामने आ रही है।

पांच जिलों में बंद का असर
मंगलवार के बंद का आह्वान मुख्य रूप से इन पांच जिलों में किया गया है:

  • गुमला
  • सिमडेगा
  • खूंटी
  • रांची
  • लोहरदगा

मुख्य मांगें: OBC आरक्षण, आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व, राजनीतिक भागीदारी, PESA के तहत अधिकार और जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम।

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