Ramgarh News: साड़ी में नंगे पांव दौड़ी कविता, ईंट-भट्ठे की मजदूरी से होमगार्ड बनने तक का संघर्ष

Kavita Devi Ramgarh

साड़ी, नंगे पांव और तपती रेत… होमगार्ड बनने के लिए रामगढ़ की कविता की दौड़ ने सबका ध्यान खींचा

Ramgarh News: मंजिल पाने के लिए महंगे जूते, ट्रैक सूट या अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर ही जरूरी नहीं होते। अगर हौसला मजबूत हो तो इंसान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा सकता है। रामगढ़ जिले के दुलमी की कविता देवी इन दिनों अपने संघर्ष और जज्बे से इसी बात की मिसाल पेश कर रही हैं। कविता देवी होमगार्ड बहाली के ट्रायल में अपने भविष्य को संवारने की कोशिश कर रही हैं। उनकी खासियत यह है कि वह तपती धूप में साड़ी पहनकर और नंगे पांव रेतीली जमीन पर दौड़ लगा रही हैं। उनकी तस्वीर सामने आने के बाद उनकी संघर्ष की कहानी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। यह सिर्फ एक बहाली परीक्षा में शामिल होने वाली महिला की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी मां की कहानी है, जिसने पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और मजदूरी करते हुए भी अपने लिए एक नया सपना देखा।

पति की मौत के बाद बढ़ गई परिवार की जिम्मेदारी
कविता देवी का जीवन पिछले कुछ वर्षों में बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजरा है। उनके पति गुजरात में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। लेकिन लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। पति की मौत का सदमा परिवार के लिए बड़ा था। परिवार इस मुश्किल से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ समय बाद उनके भैंसुर का भी निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा कविता देवी के कंधों पर आ गया। दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी के बीच कविता के सामने रोजी-रोटी की चुनौती भी थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खुद मेहनत करने का फैसला किया।

ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर बच्चों और सास-ससुर को संभाल रहीं
पति के निधन के बाद कविता देवी ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। मजदूरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने भविष्य के लिए एक नया लक्ष्य तय किया। कविता होमगार्ड बनना चाहती हैं। उनका सपना है कि नौकरी मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इसी लक्ष्य के लिए वह बहाली के ट्रायल में पूरी मेहनत कर रही हैं।

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न महंगे जूते, न ट्रेनिंग सेंटर… फिर भी जारी है दौड़
कविता देवी की कहानी का सबसे भावुक पहलू उनकी तैयारी का तरीका है। उनके पास न महंगे स्पोर्ट्स शूज हैं, न ट्रैक सूट और न ही किसी विशेष प्रशिक्षण की सुविधा। इसके बावजूद वह साड़ी में नंगे पांव दौड़ लगा रही हैं। रेतीली जमीन और तेज धूप भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही है। जहां सुविधाओं के साथ तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बेहतर प्रदर्शन के लिए अलग-अलग संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं कविता अपने सीमित साधनों के साथ बहाली की दौड़ में शामिल हैं।

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मजबूरी नहीं, सपना बन गया है उनकी ताकत
कविता की कहानी को सिर्फ गरीबी या मजबूरी की कहानी के तौर पर देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी। उनके संघर्ष में अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी का सपना भी शामिल है। पति के निधन के बाद दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी संभालते हुए होमगार्ड बनने की कोशिश करना उनके लिए आसान नहीं है। लेकिन वह रोज की मुश्किलों के बीच अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। उनकी तस्वीर यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या प्रतिभा और मेहनत के लिए सुविधाएं ही सबसे जरूरी हैं? कविता की कहानी बताती है कि कई बार संसाधनों से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति इंसान को आगे बढ़ाती है।

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कविता की कहानी दे रही है बड़ा संदेश
कविता देवी की संघर्ष यात्रा उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने परिवार और भविष्य के लिए आगे बढ़ना चाहती हैं। साड़ी में नंगे पांव रेतीली जमीन पर दौड़ती कविता सिर्फ होमगार्ड की नौकरी के लिए ट्रायल नहीं दे रही हैं। वह अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और परिवार को संभालने के लिए एक नई शुरुआत की कोशिश कर रही हैं। उनके सामने रास्ता आसान नहीं है। लेकिन उनके हौसले यह बताते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, कोशिश करने का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।

अब सफलता का इंतजार
कविता देवी की कोशिश का अगला पड़ाव होमगार्ड बहाली का परिणाम होगा। उनकी मेहनत और संघर्ष के बीच अब परिवार और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उन्हें सफलता मिलेगी। उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है—सुविधाएं कम हो सकती हैं, रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन अगर हौसला मजबूत हो तो कोशिश जारी रखी जा सकती है।कविता की दौड़ अभी खत्म नहीं हुई है। मंजिल सामने है और उम्मीद है कि उनका यह संघर्ष उन्हें उस मुकाम तक जरूर पहुंचाएगा, जिसके लिए वह तपती धूप में नंगे पांव दौड़ रही हैं।

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