रजौली में शारदीय नवरात्र के पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, कलश जल यात्रा में शामिल हुईं सैकड़ों महिलाएं
रजौली (नवादा): शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को रजौली प्रखंड क्षेत्र में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही विभिन्न देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं, कई पूजा स्थलों और घरों में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई। नवरात्र के अवसर पर रजौली के हरदिया, अमावां और बाजार क्षेत्र में आयोजित कलश जल यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। हरदिया स्थित काली मंदिर की कलश जल यात्रा में करीब 1,200 महिलाओं के शामिल होने की बात कही गई, जबकि अमावां गांव में लगभग 1,000 महिला-पुरुष श्रद्धालु कलश यात्रा में शामिल हुए।
हरदिया में 1,200 महिलाओं ने निकाली कलश जल यात्रा
हरदिया स्थित काली मंदिर में कलश स्थापना के लिए रविवार को भव्य कलश जल यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। बताया गया कि करीब 1,200 महिलाएं कलश लेकर यात्रा में शामिल हुईं। कलश यात्रा हरदिया स्थित काली मंदिर से शुरू हुई और श्रद्धालु फुलवरिया डैम पहुंचे। वहां से शुद्ध जल लेकर श्रद्धालु वापस मंदिर पहुंचे। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार जल से भरे कलश की विधिवत स्थापना की गई। कलश जल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पूरा क्षेत्र धार्मिक माहौल में डूबा नजर आया।
अमावां में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
अमावां गांव में भी नवरात्र के पहले दिन कलश जल यात्रा निकाली गई। इसमें करीब एक हजार महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है। श्रद्धालु कलश लेकर यात्रा में शामिल हुए और निर्धारित जल स्रोत से जल लेकर पूजा स्थल पहुंचे। इसके बाद विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गई।

रजौली बाजार में भी निकली कलश यात्रा
रजौली बाजार, बजरंगबली चौक और पुरानी बस स्टैंड क्षेत्र में आयोजित दुर्गा पूजा एवं काली पूजा को लेकर भी कलश जल यात्रा निकाली गई। पूजा समितियों और मंदिरों से शुरू हुई कलश यात्राएं धनार्जय नदी तक पहुंचीं। श्रद्धालुओं ने वहां से जल भरा और फिर बाजार के विभिन्न हिस्सों से होते हुए वापस मंदिरों और पूजा पंडालों तक पहुंचे। इसके बाद पूजा-अर्चना के साथ कलश की विधिवत स्थापना की गई।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण देवी के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा गया। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार पहले और अंतिम दिन व्रत रखते हैं। मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्र का आध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठान शुरू माना जाता है।

मंदिरों और घरों में हुआ कलश स्थापना
नवरात्र के पहले दिन रजौली प्रखंड के विभिन्न देवी मंदिरों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी कलश स्थापित किया। सुबह से ही पूजा-पाठ और देवी आराधना का दौर शुरू हो गया। मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नवरात्र के नौ दिनों तक क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने की उम्मीद है।
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