रांची में ₹2000 के फर्जी ट्रैफिक चालान का मैसेज, वाहन नंबर सही देखकर न करें ये गलती

Ranchi fake traffic challan

Ranchi Cyber Fraud: राजधानी रांची में साइबर अपराधियों ने वाहन चालकों को ठगी का शिकार बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। मंगलवार सुबह से कई लोगों के मोबाइल पर ₹2,000 का ट्रैफिक चालान कटने का फर्जी मैसेज भेजा गया। मैसेज में वाहन का सही नंबर दर्ज होने के साथ एक संदिग्ध लिंक भी दिया गया, जिससे कई लोग इसे असली चालान समझ बैठे। साइबर ठगों की इस नई चाल में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मैसेज में वाहन नंबर की सही जानकारी होने के कारण लोगों को पहली नजर में इसमें कोई शक नहीं हुआ। अचानक चालान कटने का संदेश मिलने के बाद कई वाहन चालक घबरा गये और कुछ लोगों ने मैसेज में दिये गये लिंक पर क्लिक भी कर दिया।

₹2000 चालान का मैसेज भेजकर बनाया जा रहा निशाना
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह कई मोबाइल नंबरों पर ₹2,000 के ट्रैफिक चालान से संबंधित मैसेज पहुंचा। मैसेज में दावा किया गया कि संबंधित वाहन का चालान काटा गया है और उसकी जानकारी देखने या कार्रवाई पूरी करने के लिए दिए गये लिंक पर क्लिक करना होगा। मैसेज 8103599671 नंबर से भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, किसी मोबाइल नंबर से संदेश भेजा जाना मात्र इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं है कि वही व्यक्ति साइबर ठगी के पीछे है। पूरे मामले की जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

लिंक खोलते ही ऐप डाउनलोड करने का विकल्प
फर्जी मैसेज में दिए गये लिंक पर क्लिक करने के बाद NxtGen mParivahan नाम का ऐप डाउनलोड करने का विकल्प दिखाई दे रहा था। ऐसे लिंक से डाउनलोड होने वाली APK फाइल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। साइबर अपराधी अक्सर सरकारी सेवाओं के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश करते हैं। संदिग्ध लिंक के जरिये डाउनलोड कराया गया ऐप मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी, मैसेज, कॉन्टैक्ट या अन्य संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे मामलों में किसी भी अनजान वेबसाइट या मैसेज से APK फाइल डाउनलोड करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

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सही वाहन नंबर देखकर लोग भी हुए भ्रमित
इस साइबर ठगी में अपराधियों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए वाहन से जुड़ी सही जानकारी का इस्तेमाल किया। मैसेज में वाहन नंबर सही होने के कारण कई वाहन मालिकों को लगा कि उनका वास्तविक चालान कट गया है। अचानक ₹2,000 के जुर्माने का मैसेज मिलने पर वाहन चालक यह सोचकर घबरा गये कि कहीं ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण उनके वाहन पर कार्रवाई तो नहीं हुई है। इसी डर और जल्दबाजी का फायदा साइबर ठग उठाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोगों ने लिंक पर क्लिक कर दिया, जबकि कुछ लोगों ने समय रहते संदिग्ध ऐप को मोबाइल से हटा दिया।

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ट्रैफिक एसपी ने किया सावधान
रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने वाहन चालकों से ऐसे संदिग्ध मैसेज से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। अगर मोबाइल पर ट्रैफिक चालान का मैसेज आता है, तो लिंक पर क्लिक करने के बजाय आधिकारिक माध्यम से चालान की स्थिति की जांच करनी चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक से ऐप डाउनलोड करने या उसमें बैंकिंग एवं निजी जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।

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चालान चेक करने के लिए सिर्फ आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें
वाहन चालक अपने चालान की जानकारी और भुगतान के लिए परिवहन विभाग के आधिकारिक ई-चालान पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आधिकारिक ई-चालान पोर्टल:
echallan.parivahan.gov.in

किसी SMS, WhatsApp या अन्य मैसेज में आये लिंक पर भरोसा करने के बजाय ब्राउजर में आधिकारिक वेबसाइट स्वयं खोलकर वाहन नंबर या उपलब्ध आवश्यक जानकारी के माध्यम से चालान की स्थिति जांचना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

अगर लिंक पर क्लिक कर दिया है तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति ने गलती से संदिग्ध लिंक खोल दिया है या कोई ऐप डाउनलोड कर लिया है, तो तुरंत कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • संदिग्ध ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें।
  • मोबाइल में बैंकिंग ऐप और अन्य महत्वपूर्ण अकाउंट की गतिविधियों पर नजर रखें।
  • संदिग्ध ऐप को दी गयी परमिशन की जांच करें।
  • जरूरत पड़ने पर बैंकिंग पासवर्ड और जरूरी सिक्योरिटी क्रेडेंशियल बदलें।
  • अगर बैंक खाते से जुड़ी जानकारी साझा हुई है या पैसे कट गये हैं, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।
  • साइबर ठगी की स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत करें।

साइबर ठगी से बचने का आसान नियम
चालान का मैसेज आया है तो घबराएं नहीं, लिंक पर क्लिक न करें। सरकारी सेवा से संबंधित जानकारी हमेशा संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही जांचें। साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। इसलिए किसी भी मैसेज में सही वाहन नंबर, चालान की रकम या सरकारी सेवा का नाम देखकर उसे तुरंत असली न मानें। सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

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