रजौली के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बड़ा सवाल, ग्रामीण बोले- कई केंद्र रहते हैं बंद; बच्चों और महिलाओं को लाभ नहीं

Rajauli Anganwadi Centre

रजौली (नवादा): रजौली प्रखंड क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रखंड के कई आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलते और कुछ केंद्र यदि खुलते भी हैं तो वहां बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रहती है। इससे बच्चों को मिलने वाली प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुढ़ियासाख आंगनबाड़ी केंद्र, बखोरी आंगनबाड़ी केंद्र और सवैयाटाड़ पंचायत के सपही गांव के ग्रामीणों ने केंद्रों के संचालन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार केंद्र बंद ही रहते हैं और खुलने की स्थिति में भी बच्चों तथा गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलतीं।

ग्रामीणों का आरोप- नियमित नहीं खुलते आंगनबाड़ी केंद्र
ग्रामीणों के मुताबिक बुढ़ियासाख और बखोरी समेत कई आंगनबाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। सवैयाटाड़ पंचायत के सपही गांव के ग्रामीणों ने भी केंद्र के संचालन को लेकर शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आंगनबाड़ी केंद्र ही नियमित रूप से नहीं खुलेगा तो बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा कैसे मिलेगी। उनका आरोप है कि केंद्रों में पढ़ने वाले कई बच्चों को शुरुआती स्तर की शिक्षा तक ठीक से नहीं मिल पा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

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बच्चों की कम उपस्थिति को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों के अनुसार कुछ केंद्रों पर बच्चों की संख्या बेहद कम दिखाई देती है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों के वास्तविक संचालन और वहां दर्ज बच्चों की संख्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को स्कूल जाने से पहले प्रारंभिक शिक्षा के साथ पोषण और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में केंद्रों के अनियमित संचालन का सीधा असर बच्चों पर पड़ने की आशंका है।

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गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को लाभ नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं भी कई जगह नियमित रूप से नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत महिलाओं और बच्चों के लिए मिलने वाली सेवाओं का लाभ अगर समय पर नहीं पहुंचेगा तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।

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सुपरवाइजर की जांच पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि महिला सुपरवाइजर जब केंद्रों की जांच के लिए पहुंचती हैं तो वास्तविक व्यवस्था की जांच ठीक से नहीं की जाती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निरीक्षण महज औपचारिकता बनकर रह गया है। हालांकि, शुभ लाभ लेने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इस संबंध में विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

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शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और प्रसूता महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले।

CDPO से संपर्क की कोशिश, पक्ष नहीं मिला
इस संबंध में रजौली की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) नीति कुमार का पक्ष जानने के लिए दो बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। विभाग का पक्ष सामने आने के बाद इस मामले में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों की शिकायतों के बीच अब सवाल यह है कि रजौली प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों का जमीनी स्तर पर नियमित संचालन कितना प्रभावी है और बच्चों एवं महिलाओं के लिए निर्धारित योजनाओं का लाभ वास्तव में कितने लोगों तक पहुंच रहा है।

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