Air France का बड़ा फैसला: इजरायल की उड़ानों में पाकिस्तानी पायलटों और क्रू पर रोक
नई दिल्ली/पेरिस: इजरायल जाने और वहां से आने वाली उड़ानों में पाकिस्तानी पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक लगाने का मामला अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। फ्रांस की एयरलाइन Air France ने इजरायली अधिकारियों के राष्ट्रीयता संबंधी नियमों का पालन करने की पुष्टि की है। इन नियमों के तहत उन देशों की नागरिकता रखने वाले पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल जाने वाली उड़ानों में ड्यूटी नहीं दी जा सकती, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान भी इस सूची में शामिल है।
एयर फ्रांस ने कहा है कि जिन देशों में वह उड़ानें संचालित करती है, वहां यात्रियों और कर्मचारियों के प्रवेश से जुड़े नियमों का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है। कंपनी ने यह भी बताया कि प्रभावित कर्मचारियों को इजरायली अधिकारियों के नए नियमों के बारे में सूचित किया गया है।
इजरायल के नियमों में क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत में विदेशी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि इजरायली हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली उड़ानों के पायलट और केबिन क्रू ऐसे देशों की नागरिकता नहीं रखते हों, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। रिपोर्टों में पाकिस्तान के अलावा ईरान, ओमान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया और इंडोनेशिया समेत कई देशों का उल्लेख किया गया है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में प्रभावित देशों की संख्या 29 और 31 बताई गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह व्यवस्था दोहरी नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों को भी प्रभावित कर सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी के पास फ्रांस की नागरिकता के साथ-साथ प्रतिबंधित सूची में शामिल देश की नागरिकता भी है, तो उसे संबंधित उड़ान में ड्यूटी देने पर रोक लग सकती है।
फ्लाईदुबई विमान की घटना के बाद सख्ती
इजरायल के इन नियमों को सख्ती से लागू किए जाने की खबरें 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में हुई कथित घटना के बाद सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान के दौरान ओमान के सह-पायलट पर भारतीय पायलट के साथ मारपीट करने और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश करने का आरोप लगा था। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद इजरायली अधिकारियों ने विदेशी एयरलाइंस को क्रू की राष्ट्रीयता से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि ये प्रतिबंध पहली बार इसी घटना के बाद बनाए गए थे या पहले से मौजूद नियमों को अधिक सख्ती से लागू किया गया।
दूसरी एयरलाइंस भी कर रही हैं नियमों का पालन
एयर फ्रांस के अलावा चेक गणराज्य की एयरलाइन स्मार्टविंग्स ने भी इजरायल के निर्देशों का पालन करने की बात कही है। वहीं, यूनाइटेड एयरलाइंस के कर्मचारियों को भी संबंधित प्रतिबंधों की जानकारी दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से नियमों के पालन और उनके परिचालन प्रभाव को लेकर सार्वजनिक पुष्टि का स्तर अलग-अलग है। इस व्यवस्था के कारण एयरलाइंस को इजरायल जाने वाली उड़ानों के लिए पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी तय करते समय उनकी नागरिकता की जांच करनी पड़ सकती है। इससे क्रू शेड्यूलिंग और उड़ानों के संचालन की योजना प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और भेदभाव पर बहस
इस फैसले ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर भी बहस शुरू कर दी है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने राष्ट्रीयता के आधार पर कर्मचारियों को उड़ानों से हटाने की व्यवस्था पर भेदभाव संबंधी सवाल उठाए हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत देशों को अपने क्षेत्र में प्रवेश और क्रू की अनुमति से जुड़े नियम लागू करने का अधिकार भी प्राप्त है।
क्या होगा अंतरराष्ट्रीय विमानन पर असर?
यदि राष्ट्रीयता आधारित नियमों का सख्ती से पालन जारी रहता है, तो इजरायल जाने वाली उड़ानों का संचालन करने वाली एयरलाइंस को क्रू चयन और ड्यूटी आवंटन की प्रक्रियाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके साथ ही कर्मचारियों के अधिकारों, राष्ट्रीयता के आधार पर अलग व्यवहार और अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के बीच संतुलन को लेकर कानूनी चर्चा आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल एयर फ्रांस ने इजरायल के नियमों का पालन करने की पुष्टि की है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि इजरायली अधिकारी इन निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस तथा संबंधित कानूनी संस्थाएं इस पर क्या रुख अपनाती हैं।
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