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दो करोड़ रोजगार का क्या हुआ? सारथी योजना पर सियासी संग्राम, विनोद पांडेय का भाजपा से सवाल

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झामुमो महासचिव ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव का लगाया आरोप, कहा- युवाओं के रोजगार पर भाजपा पहले अपने वादों का हिसाब दे

Ranchi News: मुख्यमंत्री सारथी योजना को लेकर भाजपा की आलोचना पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पलटवार किया है। पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा से सवाल किया कि युवाओं को हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की रोजगारपरक योजनाओं पर सवाल उठाने से पहले भाजपा को केंद्र सरकार के रोजगार संबंधी वादों और उनके क्रियान्वयन का हिसाब देना चाहिए। विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में युवा रोजगार, सरकारी नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इसके बावजूद भाजपा झारखंड सरकार की योजनाओं पर राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है। उनके मुताबिक, रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के प्रति अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री सारथी योजना पर क्या बोले विनोद पांडेय?
झामुमो महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सारथी योजना को युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जुड़ी योजना बताया। पांडेय ने कहा कि भाजपा यदि इस योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाती है, तो उसे तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय योजना के उद्देश्यों, उपलब्धियों और कमियों पर तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा से केंद्र सरकार की रोजगार नीतियों और सरकारी रिक्त पदों पर नियुक्तियों की स्थिति को लेकर भी जवाब मांगा। उनका कहना था कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकारों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस विषय पर सभी पक्षों को जवाबदेह होना चाहिए।

केंद्र पर झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप
विनोद पांडेय ने केंद्र की भाजपा सरकार पर झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रांश की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होने से योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। झामुमो महासचिव के अनुसार, केंद्र सरकार को राज्यों को मिलने वाली निर्धारित राशि समय पर उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि गरीबों, जरूरतमंदों और आम नागरिकों के हित में संचालित योजनाएं प्रभावित न हों। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय मामलों में राज्य के हितों की अनदेखी से विकास कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर असर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में केंद्रांश की राशि से संबंधित किसी विशिष्ट योजना, बकाया रकम या भुगतान की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।

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रोजगार और नियुक्तियों पर भाजपा से मांगा जवाब
पांडेय ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि केंद्र सरकार ने बेरोजगारी दूर करने, सरकारी रिक्त पदों को भरने और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और रोजगार की मांग को लेकर युवाओं की नाराजगी का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के सवालों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, रोजगार के मुद्दे पर केवल राज्य सरकार की आलोचना करना पर्याप्त नहीं है; केंद्र सरकार की नीतियों और परिणामों पर भी सवाल पूछे जाने चाहिए।

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झारखंड सरकार की योजनाओं पर सियासी बहस तेज
मुख्यमंत्री सारथी योजना और रोजगार के मुद्दे पर झामुमो के इस बयान ने राज्य की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकारों की जवाबदेही को लेकर बहस को सामने रखा है। झामुमो ने जहां राज्य सरकार की कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी पहलों का बचाव किया, वहीं भाजपा से केंद्र सरकार के रोजगार संबंधी वादों का हिसाब मांगने की बात कही। विनोद पांडेय ने भाजपा से रोजगार के मुद्दे पर दोहरा रवैया छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री सारथी योजना के क्रियान्वयन में कोई कमी है, तो उसे तथ्यों के साथ सामने लाया जाना चाहिए। साथ ही, केंद्र सरकार को भी रोजगार और राज्यों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के सवालों पर जवाब देना चाहिए।

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