पहलगाम हमला: हिंदू या मुस्लिम नहीं, इंसानियत की हत्या हुई है – झामुमो

पहलगाम आतंकी हमला

रांची,24 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद कुमार पांडेय ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि यह हमला किसी धर्म विशेष पर नहीं, इंसानियत पर हमला है। उन्होंने इसे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना करार देते हुए केंद्र सरकार से कड़े और निर्णायक कदम उठाने की मांग की है।

“यह हिंदू या मुस्लिम की नहीं, इंसानियत की हत्या है”

विनोद कुमार पांडेय ने कहा:

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“हमले में मारे गए लोगों में सिर्फ हिंदू नहीं, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के पर्यटक भी शामिल थे। यह नफरत और हिंसा का वह चेहरा है जो इंसानियत को लहूलुहान करता है। इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है।”

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सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

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झामुमो नेता ने कहा कि पहलगाम देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय और संवेदनशील स्थल है, ऐसे में यह सवाल उठता है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद आतंकियों ने इतना बड़ा हमला कैसे अंजाम दिया?
उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताया और कहा:

“इस चूक का जवाब किसी धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि जवाबदेही तय कर दिया जाना चाहिए।”

गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग

पांडेय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलवामा जैसे हमलों से कोई सबक नहीं लिया गया, और आज फिर निर्दोषों की जान गई है।

स्थानीय कश्मीरियों की मानवता और दिल्ली की लापरवाही

उन्होंने हमले के बाद स्थानीय कश्मीरियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि टैक्सी ड्राइवर, होटल संचालक और घुड़सवारों ने पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने में नि:स्वार्थ मदद की। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली से फ्लाइट किराए में भारी वसूली कर लोगों की पीड़ा को और बढ़ाया गया।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर ठोस नीति की मांग

झामुमो नेता ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की और कहा कि अब वक्त आ गया है जब सिर्फ निंदा से नहीं, व्यावहारिक और निर्णायक कार्रवाई से जवाब दिया जाना चाहिए।

पहलगाम हमला न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल है, बल्कि यह मानवता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की भी परीक्षा है। झामुमो की यह मांग और चेतावनी इस ओर संकेत है कि अब सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा – समाधान और सख्ती दोनों जरूरी हैं।

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