2026 तक चांदी में जबरदस्त तेजी संभव, सोना भी बनाएगा नया रिकॉर्ड

Bullion Market

बुलियन एक्सपर्ट कृष्णानंद पटवारी का बड़ा अनुमान

Ranchi : भारत बुलियन मार्केट को लेकर रांची ज्वैलरी एसोसिएशन के सदस्य एवं ऑल इंडिया बुलियन ट्रेड से जुड़े कृष्णानंद पटवारी ने कीमती धातुओं को लेकर बड़ा अनुमान जताया है। उनके मुताबिक, अगले दो वर्षों में चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है और वर्ष 2026 तक सिल्वर 95 से 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है। फिलहाल चांदी करीब 72–73 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है।

उनका मानना है कि मौजूदा स्तर से चांदी में 30 से 40 प्रतिशत तक की और तेजी संभव है। वहीं सोने को लेकर भी उनका रुख पूरी तरह सकारात्मक है।

सोने में भी मजबूती, 5,100 डॉलर तक जाने की संभावना
कृष्णानंद पटवारी के अनुसार, 2026 तक सोने की कीमतें 4,900 से 5,100 डॉलर प्रति औंस के दायरे में ट्रेड कर सकती हैं। फिलहाल गोल्ड करीब 4,480 डॉलर प्रति औंस के आसपास है। इस आधार पर सोने में भी 10 से 14 प्रतिशत तक की तेजी की गुंजाइश बनी हुई है।

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चांदी में तेजी के पीछे मजबूत बुनियादी कारण
पटवारी के मुताबिक, चांदी की मौजूदा रैली किसी तात्कालिक जोश का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे बाजार में हो रहे संरचनात्मक बदलाव हैं। खासतौर पर

  • ऊंचे लीज रेट्स,
  • और पेपर सिल्वर से फिजिकल सिल्वर की ओर शिफ्ट इस तेजी के मुख्य कारण बने हैं।
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सप्लाई तंग, इसलिए कीमतों पर दबाव
उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में चांदी के लीज रेट 23–24 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। इतने ऊंचे लीज रेट इस बात का संकेत हैं कि बाजार में फिजिकल सिल्वर की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। सप्लाई तंग होने की स्थिति में कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है।

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बैंक और फंड हाउस फिजिकल सिल्वर की ओर बढ़े
कृष्णानंद पटवारी के अनुसार, अब बैंक और बड़े फंड हाउस पेपर इंस्ट्रूमेंट्स से निकलकर फिजिकल सिल्वर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इससे वास्तविक बाजार में मांग और मजबूत हुई है, जो कीमतों को लगातार सपोर्ट दे रही है।

एक महीने में 50% से ज्यादा उछाल
उन्होंने बताया कि 21 नवंबर को चांदी करीब 49 डॉलर प्रति औंस थी, जो अब बढ़कर 73 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच चुकी है। यानी सिर्फ एक महीने में 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है। इतनी तेज चाल के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ना सामान्य है।

करेक्शन आए तो घबराएं नहीं
पटवारी का कहना है कि तेजी के दौर में 18–20 प्रतिशत तक का करेक्शन आना सामान्य प्रक्रिया है। इसे ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे बुल साइकिल का हिस्सा समझना चाहिए।

निवेशकों के लिए सलाह
उनके मुताबिक, सोना और चांदी दोनों ही वोलैटाइल कमोडिटी हैं। इसलिए निवेशकों को

  • शॉर्ट टर्म गिरावट से घबराने के बजाय
  • लॉन्ग टर्म ट्रेंड पर फोकस करना चाहिए।

मौजूदा तेजी मजबूत बुनियादी कारणों पर आधारित है, जो लंबी अवधि में निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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