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CBSE को मिला नया चेयरमैन, लोखंडे प्रशांत सीताराम की हुई नियुक्ति

CBSE New Chairman

प्रशासनिक संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, वरिष्ठ IAS अधिकारी संभालेंगे बोर्ड की कमान

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में चल रहे प्रशासनिक बदलावों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार देर रात जारी आदेश के तहत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड हाल के दिनों में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, री-इवैल्यूएशन पोर्टल और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवादों का सामना कर रहा है। इन घटनाक्रमों के बीच बोर्ड में नेतृत्व परिवर्तन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशासनिक संकट के बीच लिया गया फैसला
सूत्रों के अनुसार, CBSE में पिछले कुछ समय से प्रशासनिक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही थीं। बोर्ड की विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों और बढ़ते विवादों के बीच केंद्र सरकार ने नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि नए चेयरमैन के नेतृत्व में बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

अनुभवी प्रशासक हैं लोखंडे प्रशांत सीताराम
लोखंडे प्रशांत सीताराम भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं और प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। उनकी नियुक्ति को शिक्षा प्रशासन में सुधार और बोर्ड की प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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CBSE के सामने कई चुनौतियां
नए चेयरमैन के सामने बोर्ड की डिजिटल सेवाओं को अधिक मजबूत बनाना, छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कायम रखना तथा मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना प्रमुख चुनौतियां होंगी। हाल के दिनों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी, री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया और OSM प्रणाली को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।

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सुधारों की उम्मीद
शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के आने से CBSE में प्रशासनिक स्थिरता आएगी और बोर्ड की विभिन्न प्रक्रियाओं में सुधार की गति तेज हो सकती है। देशभर के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षक अब नए चेयरमैन के नेतृत्व में CBSE की आगामी नीतियों और सुधारात्मक कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।

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केंद्र सरकार का यह फैसला बोर्ड की साख को मजबूत करने और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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