पलामू प्रमंडल में संगठित अपराध पर बड़ा एक्शन प्लान, 89 चेहरों की सूची तैयार; संपत्ति जब्ती की तैयारी
89 लोगों का गिरोहवार ब्योरा तैयार
सोशल मीडिया अकाउंट भी पुलिस की निगरानी में
नक्सलियों के खिलाफ अपनाए मॉडल से अब संगठित अपराध पर प्रहार
Palamu: झारखंड के पलामू प्रमंडल में नक्सली गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद अब संगठित अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों की पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े 89 लोगों की विस्तृत सूची तैयार की है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों के संबंध राज्य में सक्रिय अलग-अलग आपराधिक गिरोहों से बताए गए हैं। पुलिस अब केवल आपराधिक गतिविधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संगठित अपराध के कथित आर्थिक नेटवर्क को भी निशाना बनाने की तैयारी में है। इसके तहत सूची में शामिल लोगों की चल-अचल संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायालय के आदेश के अनुरूप संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।
89 लोगों का गिरोहवार ब्योरा तैयार
पुलिस की तैयार सूची में कई चर्चित आपराधिक गिरोहों से जुड़े लोगों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- डब्लू सिंह गिरोह से जुड़े 35 लोग
- सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े 18 लोग
- प्रिंस खान गिरोह से जुड़े 15 लोग
- राहुल सिंह गिरोह से जुड़े 15 लोग
- राहुल दुबे गिरोह से जुड़े 3 लोग
- अमन साहू गिरोह से जुड़े 3 लोग
पुलिस के अनुसार सूची में शामिल लोगों की वर्तमान स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है। इनमें कुछ लोग जेल में हैं, जबकि कुछ जमानत पर बाहर बताए जा रहे हैं।
जेल में बंद और बाहर रहने वालों की अलग निगरानी
पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े जेल में बंद लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखने की रणनीति बनाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रिंस खान गिरोह के आठ, राहुल सिंह गिरोह के 16 और राहुल दुबे गिरोह का एक सदस्य जेल में है, जबकि राहुल दुबे गिरोह से जुड़े दो लोगों के जमानत पर होने की बात सामने आई है। वहीं, डब्लू सिंह गिरोह से जुड़े सूचीबद्ध 35 लोगों के जमानत पर बाहर होने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब जेल में बंद और बाहर मौजूद संदिग्ध अपराधियों की गतिविधियों का अलग-अलग तरीके से आकलन कर रही है, ताकि संभावित आपराधिक नेटवर्क पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
संपत्ति जब्ती पर पुलिस का फोकस
संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की रणनीति में आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना अहम हिस्सा है। इसी के तहत सूची में शामिल सभी 89 लोगों की संपत्ति का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नए आपराधिक कानूनों में उपलब्ध प्रावधानों के तहत संगठित अपराध से जुड़े मामलों में चल-अचल संपत्ति के संबंध में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेश के अधीन होगी। इस उद्देश्य से पुलिस ने विशेष टीम गठित की है। फिलहाल पहले चरण में संबंधित लोगों की संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
15 लोगों पर सीसीए की तैयारी
पुलिस की कार्रवाई सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं रहने वाली है। जानकारी के अनुसार सुजीत सिन्हा गिरोह के तीन, डब्लू सिंह गिरोह के 10 और राहुल सिंह गिरोह के दो सदस्यों के खिलाफ सीसीए की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने और बाहर रह रहे संभावित अपराधियों के खिलाफ निगरानी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
सोशल मीडिया अकाउंट भी पुलिस की निगरानी में
संगठित अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस ने सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखने की तैयारी की है। सूची में शामिल लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट की मॉनिटरिंग के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस यह देख रही है कि आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोग सोशल मीडिया के जरिए किसी तरह का संपर्क, धमकी, नेटवर्किंग या आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास तो नहीं कर रहे हैं।
नक्सलियों के खिलाफ अपनाए मॉडल से अब संगठित अपराध पर प्रहार
पलामू प्रमंडल कभी नक्सली हिंसा के लिए झारखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा में रहा है। वर्ष 2018-19 तक पलामू, गढ़वा और लातेहार क्षेत्र में नक्सली संगठनों की सक्रियता बड़ी चुनौती थी। पलामू और लातेहार में टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां भी रही हैं। हालांकि, सुरक्षा बलों और पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद क्षेत्र में नक्सली प्रभाव काफी कमजोर हुआ है। अब पुलिस संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उसी तरह की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। नक्सलियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों पर कार्रवाई के अनुभव को संगठित अपराध के खिलाफ इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
आर्थिक साम्राज्य पर चोट की रणनीति
पुलिस का मानना है कि किसी भी संगठित आपराधिक नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उसके आर्थिक स्रोतों पर प्रहार जरूरी है। यही वजह है कि इस बार कार्रवाई में संपत्ति का आकलन, जब्ती की कानूनी प्रक्रिया, सीसीए, गिरफ्तारी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग जैसे कई स्तरों को शामिल किया गया है। इससे पुलिस की कोशिश सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कथित आपराधिक नेटवर्क को आर्थिक और संगठनात्मक रूप से कमजोर करने पर भी होगी।
DIG किशोर कौशल ने क्या कहा?
पलामू के डीआईजी किशोर कौशल के अनुसार, पलामू, गढ़वा और लातेहार में संगठित अपराध से जुड़े लोगों का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया गया है। तीनों जिलों से आंकड़े जुटाकर संबंधित पुलिस अधीक्षकों को सूची के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जेल में बंद लोगों की गतिविधियों का आकलन कर सीसीए की कार्रवाई के लिए कहा गया है, जबकि बाहर मौजूद संभावित अपराधियों के खिलाफ निगरानी और सीसीए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है। डीआईजी के मुताबिक, कानून के प्रावधानों के तहत संगठित अपराध से जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्ति के संबंध में न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है और सभी एसपी को संपत्ति के आकलन के निर्देश दिए गए हैं।
नक्सल से संगठित अपराध तक बदली चुनौती
पलामू प्रमंडल में अपराध का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। जहां पहले पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सली हिंसा थी, वहीं अब संगठित अपराध, आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क और उनके आर्थिक स्रोतों पर नियंत्रण बड़ी प्राथमिकता बनता जा रहा है। पुलिस द्वारा तैयार 89 लोगों की सूची इसी बदलती चुनौती का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, सूची में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। संबंधित लोगों की भूमिका और किसी भी संभावित आपराधिक संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
अब आगे क्या?
फिलहाल पुलिस की नजर तीन प्रमुख बिंदुओं पर है—पहला, सूची में शामिल लोगों की गतिविधियों और आपराधिक रिकॉर्ड की निगरानी। दूसरा, कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े आर्थिक स्रोतों और संपत्तियों का आकलन। तीसरा, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई।
अगर पुलिस की यह रणनीति प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती है तो पलामू प्रमंडल में संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में संपत्ति आकलन, सीसीए प्रस्ताव और गिरफ्तारी अभियान के आधार पर इस कार्रवाई का अगला चरण सामने आने की उम्मीद है।





