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सपही के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, दोपहर एक बजे ही लटक जाता है ताला

Sapahi Primary School

रजौली (नवादा): रजौली प्रखंड के सुदूरवर्ती सवैयाटांड़ पंचायत स्थित सपही गांव के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में कई शिक्षक पदस्थापित होने के बावजूद स्कूल का संचालन नियमित रूप से नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि कई बार दोपहर करीब एक बजे ही विद्यालय में ताला लटका दिया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, कभी-कभार एक शिक्षक विद्यालय पहुंचते हैं, हाजिरी बनाते हैं और इसके बाद चले जाते हैं। शिक्षक के विद्यालय से निकलने के बाद स्कूल में ताला लटक जाता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना भी बंद है। हालांकि, इन आरोपों पर शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

कई शिक्षक पदस्थापित, फिर भी पढ़ाई पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में कई शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन उनकी नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में कभी-कभार एक शिक्षक आते हैं और हाजिरी बनाने के बाद वापस चले जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और स्कूल समय से पहले ही बंद हो जाता है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मध्याह्न भोजन भी बंद होने का आरोप
ग्रामीणों ने विद्यालय में मध्याह्न भोजन नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ सरकार की ओर से मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी नियमित रूप से मिलनी चाहिए। मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें पोषण उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में योजना के बंद होने की शिकायत सामने आने के बाद इसकी वास्तविक स्थिति की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

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ग्रामीण बोले- लंबे समय से बनी हुई है समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि यह कथित स्थिति किसी एक दिन की नहीं है। लंबे समय से विद्यालय के इसी तरह संचालित होने की बात सामने आती रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले वे विद्यालय के दोपहर में बंद होने को सामान्य प्रक्रिया मानते थे, लेकिन अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों पर निर्भर गरीब परिवारों के बच्चों को यदि नियमित पढ़ाई का माहौल नहीं मिलेगा, तो उनके शैक्षणिक भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

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जंगली क्षेत्र में शिक्षा की अहमियत और ज्यादा
सवैयाटांड़ पंचायत का यह इलाका सुदूरवर्ती और जंगली क्षेत्र में आता है। ऐसे क्षेत्रों में सरकारी विद्यालय स्थानीय बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि विद्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं होता है या शिक्षक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते हैं, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ता है।

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अब शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी नजर
ग्रामीणों ने विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई, स्कूल के समय से पहले बंद होने और मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय में वास्तव में कितने शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं? बच्चों की पढ़ाई कितनी देर तक होती है? मध्याह्न भोजन क्यों बंद है? इन सभी बिंदुओं की जांच कौन करेगा? ग्रामीणों की नजर अब जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर है। हालांकि, इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। विभाग की जांच और जवाब के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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