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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर झारखंड अलर्ट, 14 हजार जवान तैनात; CCTV और फेस रिकग्निशन से निगरानी

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आपात स्थिति के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार, पुलिस और प्रशासन ने लोगों से मांगा सहयोग

रांची: दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन को लेकर झारखंड पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। राज्यभर में शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को संपन्न कराने के लिए करीब 14 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों की भी अलग-अलग स्थानों पर प्रतिनियुक्ति की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी मिलाकर करीब 5,600 दुर्गा पूजा पंडाल हैं। इन पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गई है, जिसके अगले करीब तीन दिनों तक चलने की संभावना है। विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस किया गया है।

विसर्जन को लेकर राज्यभर में सुरक्षा का बड़ा इंतजाम
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मियों के साथ मजिस्ट्रेट और वरीय पुलिस पदाधिकारियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी गई है। विसर्जन जुलूस के मार्ग, प्रमुख चौक-चौराहों, नदी घाटों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार रखा गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल को तत्काल संबंधित क्षेत्र में भेजने की व्यवस्था भी की गई है।

करीब 5,600 पूजा पंडालों में स्थापित हैं प्रतिमाएं
राज्य में इस वर्ष लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी मिलाकर करीब 5,600 दुर्गा पूजा पंडाल बनाए गए हैं। पूजा संपन्न होने के बाद अब इन पंडालों से प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए निर्धारित घाटों तक ले जाया जा रहा है। विसर्जन के दौरान कई इलाकों में जुलूस निकलने के कारण सड़कों पर भीड़ बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखने की भी चुनौती है। रांची समेत राज्य के प्रमुख शहरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल को विशेष रूप से अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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CCTV कैमरों से होगी लगातार निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए CCTV कैमरों के जरिए भीड़ और प्रमुख इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर लगे कैमरों के माध्यम से पुलिस गतिविधियों पर नजर रखेगी। विसर्जन के दौरान भीड़ के दबाव, किसी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति सामने आने पर पुलिस को त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

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फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर की मदद से निगरानी की जा रही है। इस तकनीक का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति की पहचान करने में मदद के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यदि पूजा या विसर्जन के दौरान कोई व्यक्ति लापता होता है, तो उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के जरिए उसकी पहचान करने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा एजेंसियों को संभावित संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान में भी तकनीक मदद कर सकती है।

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आपात स्थिति के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार
विसर्जन के दौरान अचानक उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कंटीजेंसी प्लान तैयार किया है। इसका उद्देश्य किसी दुर्घटना, अत्यधिक भीड़, कानून-व्यवस्था की समस्या या अन्य आपात परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। इसके अलावा अग्निशमन विभाग की गाड़ियों को भी आवश्यक स्थानों पर लगाया गया है, ताकि किसी भी तरह की आग या अन्य आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्रवाई की जा सके।

पुलिस और प्रशासन ने लोगों से मांगा सहयोग
अधिकारियों ने श्रद्धालुओं और पूजा समितियों से अपील की है कि वे प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। जुलूस को निर्धारित मार्ग से ले जाने, भीड़ को नियंत्रित रखने और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई है। पुलिस ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती के बावजूद शांतिपूर्ण विसर्जन के लिए आम लोगों और पूजा समितियों का सहयोग बेहद जरूरी है।

तीन दिनों तक चल सकता है विसर्जन का सिलसिला
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में बुधवार से शुरू हुई दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया करीब तीन दिनों तक चल सकती है। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा समितियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगी। पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि पूरे विसर्जन कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जाए और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

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