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कोलकाता पंडाल हादसे के बाद झारखंड अलर्ट, पूजा पंडालों की सुरक्षा जांच के निर्देश

Jharkhand Durga Puja Pandal Security

पंडालों की मजबूती और प्रवेश-निकास की होगी समीक्षा

रांची: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दर्दनाक भगदड़ के बाद झारखंड में भी दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। राज्यभर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन को पंडालों का दोबारा निरीक्षण करने और सुरक्षा व्यवस्था में पाई जाने वाली कमियों को तत्काल दूर कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को पूजा पंडालों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास के रास्तों तथा सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने को कहा है। इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान भगदड़, आगजनी और अन्य संभावित हादसों को रोकना है।

कोलकाता की घटना के बाद सुरक्षा पर जोर
कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की शाम भारी भीड़ और बारिश के बीच भगदड़ हुई थी। इस हादसे में 19 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी पृष्ठभूमि में झारखंड में भी पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रहे और किसी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

पंडालों की मजबूती और प्रवेश-निकास की होगी समीक्षा
सुरक्षा व्यवस्था के तहत पंडालों की संरचनात्मक मजबूती, भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम, प्रवेश और निकास द्वार तथा आपातकालीन रास्तों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, बिजली के अस्थायी कनेक्शन और भीड़ के दबाव वाले स्थानों की भी जांच की जानी चाहिए। पुलिस अधिकारियों को निर्देश है कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर कराने के लिए संबंधित पूजा समितियों और जिम्मेदार विभागों के साथ समन्वय किया जाए।

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श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
दुर्गा पूजा के दौरान प्रमुख पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ का दबाव बढ़ने पर प्रवेश और निकास मार्ग बाधित होने का खतरा रहता है। सुरक्षा व्यवस्था में छोटी-सी चूक भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए पूजा समितियों से भी अपेक्षा है कि वे पुलिस और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, स्वयंसेवकों को भीड़ प्रबंधन के लिए तैयार रखें और आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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