IIIT रांची में छात्र की मौत के बाद हंगामा, एंबुलेंस और इलाज की व्यवस्था पर सवाल

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IIIT रांची में छात्र आदित्य की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल

पूर्णिया के रहने वाले प्रथम वर्ष के छात्र की मौत के बाद कैंपस में प्रदर्शन; एंबुलेंस, ऑक्सीजन और समय पर इलाज को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल

रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य की असमय मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा मामले पर संज्ञान लिए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्र की मौत के बाद संस्थान की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले आदित्य की मौत के बाद शनिवार देर रात संस्थान के हॉस्टल में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में गंभीर कमियां रहीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मौत के कारणों का आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर परेशान हुए साथी छात्र
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 11:30 बजे तक आदित्य के कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर उसके साथी छात्र चिंतित हो गए। इसके बाद दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचने पर आदित्य अचेत अवस्था में मिला। साथी छात्र उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद हॉस्टल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। छात्र अपने साथी की मौत से दुखी थे और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर जवाब मांग रहे थे।

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एंबुलेंस और ऑक्सीजन सुविधा पर छात्रों के सवाल
आदित्य की मौत के बाद छात्रों ने संस्थान की चिकित्सा सुविधाओं पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो सकीं। कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी चिंताएं साझा कीं। उनके अनुसार, आपातकालीन सहायता मिलने में देरी हुई और एंबुलेंस में जरूरी उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी समस्या थी। इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। छात्रों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि आपातकाल के दौरान संस्थान की ओर से क्या कदम उठाए गए थे। उनका कहना है कि परिसर में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे किसी भी छात्र को गंभीर स्वास्थ्य संकट के दौरान तत्काल सहायता मिल सके।

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परीक्षा के दबाव की आशंका, लेकिन कारण की पुष्टि नहीं
पुलिस के अनुसार, आदित्य की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा से जुड़े तनाव को लेकर आशंका जताई गई है, लेकिन छात्र की मौत का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में किसी एक वजह को मौत का कारण मानना उचित नहीं होगा। वास्तविक परिस्थितियों का पता पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही चल सकेगा।

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मानवाधिकार आयोग के संज्ञान की जानकारी
मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के संज्ञान लेने की जानकारी सामने आने के बाद संस्थान की जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। आयोग की औपचारिक कार्यवाही, संबंधित अधिकारियों को नोटिस या रिपोर्ट तलब किए जाने के बारे में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने पर विवरण अपडेट किया जाना चाहिए। मानवाधिकार के दृष्टिकोण से यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि छात्र को आपातकाल में किस तरह की सहायता मिली, एंबुलेंस की स्थिति क्या थी और संस्थान में चिकित्सा आपातकाल से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।

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डीएसपी ने कहा—पुलिस कर रही है जांच
सदर डीएसपी संजीव कुमार बेसरा के अनुसार, पुलिस को छात्र की मौत की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक जांच-पड़ताल की और शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है। छात्र की मौत के बाद हॉस्टल में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को शांत कराने के लिए भी पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है।

संस्थान की जवाबदेही और आपातकालीन व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिसर में एंबुलेंस की उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मियों की मौजूदगी, ऑक्सीजन सहित जरूरी उपकरण और आपात स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि आदित्य की मौत किन परिस्थितियों में हुई और चिकित्सा सहायता से संबंधित छात्रों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच के निष्कर्ष और संस्थान प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

Munadi Live इस मामले में पुलिस जांच, मानवाधिकार आयोग की आधिकारिक कार्यवाही और IIIT रांची प्रबंधन के पक्ष से जुड़े अपडेट पर नजर रखेगा।

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