साड़ी से स्पोर्ट्स किट तक… नंगे पैर दौड़कर वायरल हुईं कविता फिर मैदान में उतरीं, अब खाकी वर्दी की तैयारी
रामगढ़: कभी साड़ी पहनकर और नंगे पैर 1600 मीटर की दौड़ लगाती एक महिला की तस्वीर और वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा था। वह महिला थीं रामगढ़ की कविता देवी। मुश्किल हालात, सीमित संसाधन और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जिस हिम्मत के साथ दौड़ लगाई, वह उनकी पहचान बन गई। अब वही कविता देवी एक बार फिर मैदान में हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उनके पैरों में जूते हैं, शरीर पर स्पोर्ट्स किट है और आंखों में पहले से ज्यादा बड़ा सपना।
नंगे पैर दौड़ से अब स्पोर्ट्स किट तक का सफर
कविता देवी की पहली तस्वीर सामने आई तो वह साड़ी पहनकर बिना जूते के दौड़ती नजर आई थीं। न कोई महंगा ट्रैक, न प्रोफेशनल ट्रेनिंग और न ही खेलों के लिए जरूरी संसाधन। इसके बावजूद उन्होंने 1600 मीटर की दौड़ पूरी करने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया। उनकी कहानी सामने आने के बाद लोगों ने उनके संघर्ष और हौसले की जमकर सराहना की। लेकिन सोशल मीडिया पर मिली पहचान के बाद कविता ने रुकने के बजाय अपनी मेहनत और तेज कर दी। अब वह स्पोर्ट्स किट पहनकर मैदान में अभ्यास करती दिखाई दे रही हैं। उनकी दौड़ में अब सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि अपने सपने को पूरा करने का जुनून भी नजर आता है।
परिवार की जिम्मेदारी के बीच खाकी का सपना
कविता देवी के लिए यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है। उनके पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक लक्ष्य तय किया है—खाकी वर्दी पहनना। उनका सपना है कि मेहनत के दम पर उन्हें सरकारी नौकरी मिले और परिवार का भविष्य बेहतर हो सके। इसी लक्ष्य को लेकर वह लगातार मैदान में पसीना बहा रही हैं। पहले जिन परिस्थितियों में उन्होंने नंगे पैर दौड़ लगाई थी, वही परिस्थितियां अब उनके लिए हौसले की वजह बन चुकी हैं।
वायरल हुईं तो बढ़ा आत्मविश्वास, नहीं रुकी मेहनत
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कविता देवी को लोगों का समर्थन और पहचान मिली। लेकिन उनके लिए असली चुनौती वायरल होना नहीं, बल्कि उस मौके को अपनी मंजिल तक पहुंचाना है। इसलिए अब वह नियमित रूप से अभ्यास पर ध्यान दे रही हैं। मैदान पर उनकी रफ्तार और मेहनत यह बताती है कि उन्हें सिर्फ लोगों की सहानुभूति नहीं चाहिए, बल्कि अपनी मेहनत से अपनी पहचान बनानी है।
साड़ी से स्पोर्ट्स किट तक… बदली तस्वीर, सपना वही
कविता देवी की कहानी में सबसे खास बात यही है कि उनकी तस्वीर जरूर बदल गई है, लेकिन उनका सपना नहीं बदला। पहले साड़ी थी, पैर नंगे थे… अब स्पोर्ट्स किट है और पैरों में जूते। लेकिन मंजिल आज भी वही है—खाकी वर्दी। उनका यह सफर उन तमाम युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। कविता ने साबित किया है कि साधन कम हो सकते हैं, लेकिन अगर हौसला बड़ा हो तो शुरुआत कहीं से भी की जा सकती है। मैदान पर दौड़ती कविता देवी की कहानी अब सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं रह गई है। यह संघर्ष, आत्मविश्वास और सपने के लिए लगातार लड़ने की कहानी बन चुकी है।


